“राष्ट्रीय संवहनी दिवस” पर मेरा सपना है कि “विच्छेदन मुक्त उत्तराखंड” संवहनी सर्जन / विशेषज्ञ – डॉ प्रवीण जिंदल

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Dehradun  – परिसंचरण प्रणाली जिसका अर्थ है रक्त वाहिकाएं यानी शरीर के विभिन्न अंगों में ऑक्सीजन युक्त रक्त ले जाने वाली धमनियां और डीऑक्सीजेनेटेड रक्त को हृदय में वापस ले जाने वाली नसें ऑक्सीजन के बिना, शरीर का कोई भी अंग । हिस्सा काम नहीं कर सकता है। धमनियों और नसों के रोग ऐसी स्थितियों का कारण बन सकते हैं जो या तो रक्त की आपूर्ति को रोकें या कम कर सकते हैं जैसे कि रक्त के थक्के या धमनियों का सख्त होना शरीर के किसी भी हिस्से में या उससे रक्त के प्रवाह को बाधित करना। सबसे आम धमनी समस्याएं जो हम देखते हैं वे हैं

1. पैर या टांगों में दर्द अथवा थकावट,

2. स्ट्रोक या पक्षाघात

3. पेट दर्द और

4. गैंग्रीन इत्यादि.

आम नसों की समस्यायें जिनका हम उपचार करते हैं

जिनका

1. वैरिकोज़ नर्सों

2. डीप वेन थ्रोम्बोसिस [जिसका अर्थ है नसों में रक्त के थक्के जमना जो संभावित रूपा

प्राणघातक

हो सकते हैं। और

3. क्रोनिक शिरापरक रोग [Chronic Venous Disease]

अन्य समस्याएं

1. मधुमेह में पैरों की समस्याएं व् न भरने वाले घाव ।

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2. डायलिसिस रोगियों को फिस्टुला की आवश्यकता होती है।

इन सेवाओं की उपलब्धता से बहुत सारे अंग और जीवन बचाए गए हैं, जो अन्यथा आवश्यकता के समय इन सेवाओं की अनुपलब्धता के कारण खो जाते। मैंने खुद हैदराबाद और जर्मनी में संवहनी और एंडोवैस्कुलर सर्जरी के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण प्राप्त किया है और मैं “उत्तराखंड का पहला संवहनी और एंडोवैस्कुलर सर्जन हूँ और हमेशा युवा सर्जनों और चिकित्सा बिरादरी के लिए एक प्रेरणा रहा हूँ। मुझे टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। मैं वर्तमान में वैस्कुलर सोसाइटी ऑफ इंडिया के लिए उत्तर क्षेत्र के लिए कार्यकारी समिति का सदस्य व राष्ट्रीय संकाय हूँ।
मुझे विभिन्न प्लेटफार्मों पर विशेष रूप से सशस्त्र बलों, सैन्य अस्पताल, देहरादून द्वारा पिछले18 वर्षों से सेवारत सैनिकों को मुफ्त सर्जिकल सेवाएं प्रदान करने के लिए “सुश्रुत सम्मान” के साथ सम्मानित किया गया है।
एक संवहनी सर्जन के रूप में. मैं अपने रोगियों को उनकी बीमारी और उपचार के बारे में शिक्षित कराता हूं। मैंने रेडियो फ्रीक्वेंसी एब्लेशन और अब ग्लू थेरेपी जैसी नवीनतमप्रौद्योगिकियों का उपयोग करके वैरिकाज़ नसों की गंभीर बीमारियों का सफलतापूर्वक इलाज किया है, जहां कोई टांके की आवश्यकता नहीं है।
नई प्रगति के साथ, मैं उन लोगों के अंगों को बचाने में सक्षम हूं जिन्हें विशेषज्ञता / प्रौद्योगिकी की कमी के लिए विच्छेदन की सलाह दी गई थी।
मैंने उत्तराखंड और आसपास के राज्यों के हजारों रोगियों का सफलतापूर्वक इलाज किया है। संवहनी रोग विशेष रूप से हमारे राज्य उत्तराखंड में बहुत आम हैं। क्यूंकि यह रोग पैसे व टांगों को प्रभावित करता है और रक्तस्राव, थक्के या अल्सर जैसी गंभीर जटिलताओं को जन्म देते हैं, और कभी-कभी विच्छेदन की स्तिथि भी उत्पन्न हो जाती है जो अंततः जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।

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मेरा सपना है कि

“विच्छेदन मुक्त उत्तराखंड” “AMPUTATION FREE UTTARAKHAND”

मैं एक व्यापक संवहनी देखभाल विशेषज्ञ के रूप में देखभाल का एक संपूर्ण स्पेक्ट्रम प्रदान करता हूं, जो परिसंचरण विकारों के लिए हर संभव उपचार को कवर करता है जैसे कि दवा की पर्ची से लेकर भौतिक चिकित्सा तक व् शल्य चिकित्सा से एंडोवैस्कुलर प्रक्रियाओं तक
मैं लोगों से अनुरोध करता हूं कि यदि उन्हें लगता है कि उनके लक्षण संवहनी समस्याओं में से एक हो सकते है जैसा कि नीचे उल्लेख किया गया है या कुछ भी संबंधित / समान है वह अपने संवहनी विशेषज्ञ से मिलने में संकोच न करें।
1. कम दूरी पर चलने पर पैरों में थकान ।

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2. पैरों और टांगों की सूजन।

3. पैर के रंग का परिवर्तन।

4. पैरों मे न भरने वाले धाव

5. पैरों में सुन्नपना।

6. पैर की उंगलियों / पैरों का काला पड़ जाना [गंगीन]।

7. भद्दी दिखाई देने वाली पैरों या जांघों में नीले या हरे रंग की बड़ी नसो

8. लकवा या पक्षाघात

9. पेट में तेज दर्द होना आदि।

संवहनी रोगों की रोकथाम के लिए सरल उपाय

1. किसी भी रूप में तंबाकू और शराब के सेवन से बचें।

2. शारीरिक रूप से सक्रिय रहें, आदर्श वजन बनाए रखें, पौष्टिक और संतुलित आहार खाएं।

3. अपने रक्त शर्करा और रक्तचाप को नियंत्रित करें।

4. एक स्वस्थ जीवन शैली बनाए रखें।

5. इंटरनेट से प्राप्त ज्ञान से अपना इलाज न करें।

6. अपने वैस्कुलर विशेषज्ञ से संपर्क करने में संकोच न करें।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:

डॉ प्रवीण जिंदल
वरिष्ठ सलाहकार संवहनी और एंडोवैस्कुलर सर्जरी
देहरादून