व्यापक मानसिक स्वास्थ्य नीति की दिशा में आईआईटी रुड़की की ऐतिहासिक पहल

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– इस पहल को “सहयोग 2.0” के माध्यम से और सशक्त किया गया, जो एक केंद्रित अंतर-आईआईटी संवाद था

– यह नई नीति देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में संगठित मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है

रुड़की, : भारत में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए आईआईटी रुड़की ने व्यापक मानसिक स्वास्थ्य नीति का प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करने वाला पहला भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बनकर नई मिसाल कायम की है। इस नीति का पहला प्रारूप वेलनेस सेंटर द्वारा तैयार किया गया, जो संस्थान समुदाय के मनोवैज्ञानिक कल्याण के लिए समर्पित है। इस कार्य में छात्र कल्याण अधिष्ठाता, छात्र वेलनेस के सह-अधिष्ठाता, आईआईटी रुड़की के क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक, बाहरी विशेषज्ञों तथा संकाय सदस्यों की सामूहिक विशेषज्ञता शामिल रही।

इस पहल को “सहयोग 2.0” के माध्यम से और सशक्त किया गया, जो एक केंद्रित अंतर-आईआईटी संवाद था। इसका उद्देश्य अन्य आईआईटी से सुझाव प्राप्त करना और साझा करना था, ताकि आईआईटी समुदाय के लिए एक सार्थक मानसिक स्वास्थ्य नीति ढांचा तैयार किया जा सके। इस संवाद का मकसद विभिन्न आईआईटी में प्रचलित नीतियों, प्रोटोकॉल और प्रशासनिक तंत्र से सीख लेकर एक व्यापक, समावेशी तथा छात्र एवं आईआईटी समुदाय केंद्रित नीति में उपयुक्त सुझावों को शामिल करना था।

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“सहयोग 2.0” वर्ष 2024 में आयोजित “सहयोग” की सफलता पर आधारित है तथा यह भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के हालिया निर्देशों के अनुरूप है, जो उच्च शिक्षण संस्थानों की मानसिक स्वास्थ्य प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देते हैं। कार्यक्रम के दौरान निम्नलिखित विषयों पर चर्चा की गई: मानसिक स्वास्थ्य प्रशासन एवं नीति निर्माण के संस्थागत दृष्टिकोण, निवारक, प्रोत्साहक एवं प्रत्युत्तरात्मक मानसिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप, नीति क्रियान्वयन में वेलनेस सेंटर, काउंसलिंग सेल और छात्र कल्याण संरचनाओं की भूमिका, मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की भूमिका और उन्हें उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं का सुदृढ़ीकरण, आईआईटी के बीच मानसिक स्वास्थ्य नीतियों का मानकीकरण और समन्वय, संकट स्थितियों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) का निर्माण शामिल है।

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सहयोगात्मक सत्रों ने न केवल संस्थानों के बीच पारस्परिक सीख को बढ़ावा दिया, बल्कि एक ऐसी नीति की आवश्यकता पर भी जोर दिया जो छात्र-केंद्रित, समावेशी और व्यवहारिक हो, तथा संपूर्ण आईआईटी समुदाय के मानसिक कल्याण को सुनिश्चित करे।

इस पहल पर बोलते हुए आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत ने कहा, “उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभरे हैं, और ‘सहयोग 2.0’ जैसी पहलें इस जिम्मेदारी की हमारी सामूहिक स्वीकृति को दर्शाती हैं।”

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संस्थान ने सभी आईआईटी से आए अधिष्ठाताओं, संकाय सदस्यों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्वागत किया। साथ ही एम्स ऋषिकेश, जीएमसीएच चंडीगढ़, इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज (आईएचबीएएस), दिल्ली, केजीएमयू, टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (टीआईएसएस), आईओपी कोलकाता, ओपी जिंदल, मारीवाला हेल्थ इनिशिएटिव, दिल्ली विश्वविद्यालय, यूपीएसआईएफएस सहित प्रतिष्ठित संस्थानों के बाहरी विशेषज्ञों, एक सर्वोच्च न्यायालय अधिवक्ता तथा एक मानवविज्ञानी की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी महत्वपूर्ण बना दिया। यह आयोजन आईआईटी प्रणाली में एक समान मानसिक स्वास्थ्य नीति के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

“सहयोग 2.0” की सफलता आईआईटी रुड़की की जागरूक, संवेदनशील और मानसिक रूप से मजबूत परिसर वातावरण बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह नई नीति देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में संगठित मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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