राज्य ने जल गुणवत्ता परीक्षण का शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया: महाराज

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– ग्रामीण पेयजल सेवाओं के सतत संचालन एवं रखरखाव पर मंत्री स्तरीय नीतिगत संवाद कार्यशाला आयोजित

देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड में जल जीवन मिशन के तहत वर्ष 2025-26 में जल गुणवत्ता परीक्षण का लक्ष्य शत-प्रतिशत प्राप्त कर लिया गया है ग्रामीण पेयजल योजना की संरचना एवं रखरखाव नीति में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए सुझाव को सम्मिलित करते हुए विस्तृत नीति बनाई गई है।

उक्त बात प्रदेश के सिंचाई एवं जलागम मंत्री सतपाल महाराज ने नई दिल्ली स्थित डॉ. सी. सुब्रमणियम कन्वेंशन सेंटर, जल शक्ति मंत्रालय में मंगलवार को ग्रामीण पेयजल सेवाओं के सतत संचालन एवं रखरखाव पर मंत्री स्तरीय नीतिगत संवाद कार्यशाला में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए अपने संबोधन में कही। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन को 2047 तक विकसित भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण साकार करने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य के प्रत्येक विकास खंड में योजनाओं का सोशल ऑडिट कराया जा रहा है। योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव का कार्य स्वयं सहायता समूह से कराए जाने हेतु संचालन एवं रखरखाव नीति में सम्मिलित किया गया है।

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सिंचाई एवं जलागम मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि भारत सरकार द्वारा की गई अपेक्षा के अनुसार राज्य द्वारा 65% योजनाओं की सुजलाम आईडी बनाने का कार्य पूर्ण करने के साथ-साथ 5071 हर घर जल पंचायत के सापेक्ष 25 पंचायत में जल सेवा आकलन कराया जा चुका है जबकि शेष पंचायत में शीघ्र ही कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।

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महाराज ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल से अनुरोध किया कि लगभग 7800 ग्राम पंचायत में नल जल मित्र रखे जाने हैं। जिनमें 6800 नल जल मित्रों का चयन कर लिया गया है जिनको 42 दिनों का प्रशिक्षण दिया जाना है। उन्होंने बताया कि परीक्षण के लिए नल जल मित्र इच्छुक नहीं हो पा रहे हैं क्योंकि वह अपने रोजगार को छोड़कर 42 दिन का समय नहीं दे पा रहे हैं इसलिए मेरा अनुरोध है कि इन्हें मनरेगा की भांति प्रशिक्षण पर 42 की दिहाड़ी दे दी जाये जिससे आसानी से उनका प्रशिक्षण हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में राज्य सरकार पर लगभग 1500 करोड़ की देनदारी शेष है एवं 1096 योजनाओं का कार्य धीमी गति से चल रहा है इसलिए कार्य को गति प्रदान करने हेतु आवश्यक धनराशि मुक्ति की जाए।

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कार्यशाला में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटील, केंद्रीय जलशक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना सहित समस्त राज्यों के उप मुख्यमंत्री एवं राज्यों के मंत्री उपस्थित थे।