नाबार्ड और महाराष्ट्र  सरकार की कंपनी महाप्रीट ने ग्रामीण भारत में हरित और जलवायु-सक्षम इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए समझौता ज्ञापन किया

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नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु-सहिष्णु ग्रामीण अवसंरचना और सतत सार्वजनिक परिसंपत्तियों के वित्तपोषण हेतु साझेदारी; प्रारंभिक चरण में महाराष्ट्र पर विशेष फोकस

देहरादून, : राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) तथा महाराष्ट्र सरकार के उपक्रम महात्मा फुले रिन्यूएबल एनर्जी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर टेक्नोलॉजी लिमिटेड ने ग्रामीण भारत में हरित, जलवायु-सहिष्णु और सतत अवसंरचना के विकास एवं वित्तपोषण को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत महाराष्ट्र में गांवों, पंचायती राज संस्थाओं तथा सामुदायिक स्तर की अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

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यह समझौता नाबार्ड की ग्रामीण विकास वित्त, जलवायु वित्त और हरित अवसंरचना वित्तपोषण में विशेषज्ञता तथा महाप्रीट के जलवायु-केंद्रित अवसंरचना विकास के अनुभव को एक साथ लाता है। इस सहयोग का उद्देश्य ऐसे सतत परियोजनाओं की पहचान, विकास, संरचना और वित्तपोषण को बढ़ावा देना है, जो ग्रामीण समृद्धि, जलवायु अनुकूलन क्षमता और गांवों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार को प्रोत्साहित करें।

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इस अवसर पर नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी. ने कहा, “नाबार्ड स्वच्छ और हरित ग्रामीण भारत के निर्माण के लिए समान सोच रखने वाले सभी साझेदारों के साथ मिलकर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है। महाप्रीट के साथ यह समझौता ज्ञापन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

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प्रारंभिक चरण में दोनों संस्थाओं ने हरित ऊर्जा, सरकारी भवनों के डीकार्बोनाइजेशन, ग्राम पंचायत अवसंरचना, ग्रामीण सार्वजनिक संस्थानों तथा जल पंपिंग योजनाओं को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया है। इसके अलावा, तकनीकी शिक्षा निदेशालय के संस्थानों, सरकारी एवं जिला अस्पतालों तथा ग्रामीण समुदायों को सेवाएं प्रदान करने वाले अन्य सार्वजनिक संस्थानों में स्वच्छ ऊर्जा समाधान लागू करने की भी योजना है।